राजस्थान में सिरोही और बारां में सर्वे शुरू, आंध्र में एक प्लांट से बिजली मिलना शुरू
रोशनलाल शर्मा
जयपुर। देश में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पम्प स्टोरेज प्लांट नाम की परियोजना लाई गई है। इसके तहत बांधों में पानी को अप-डाउन करके अतिरिक्त बिजली क्षमता पैदा की जाएगी। यह बंद लूप सिस्टम है, जिसमें पानी को दो रिजर्ववायर के बीच पंप करके स्टोर और जेनरेट किया जाता है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण नई दिल्ली पम्प स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) की सूची जारी की है जिसमें 38 प्लांट दिखाए गए हैं। ये सभी प्लांट वर्ष 2031-32 तक बिजली का उत्पादन शुरू कर देंगे। अनुमान है कि इनके शुरू होने से देश में 57040 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत क्षमता उपलब्ध होगी। इस योजना के तहत अक्टूबर 2025 में आंध्र प्रदेश के पिन्नापुरम में 1680 मेगावाट का एक प्लांट चालू हो गया है। जबकि उत्तराखंड के टिहरी बांध में तीन यूनिट चालू हो गई और एक अनडर कंस्ट्रक्शन है। राजस्थान में दो जगह चिन्हित की गई है। एक सिरोही में और एक बारां में।
क्या है पीएसपी परियोजना
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह परियोजना किसी पारंपरिक बांध पर आधारित नहीं है, बल्कि इसे ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड लूप सिस्टम के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि यह सीधे किसी नदी या बड़े बांध पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि एक ऊपरी और निचले जलाशय के बीच पानी को पंप करके ऊर्जा स्टोर और निकालने का काम करेगा। इस तरह के सिस्टम में पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है और ऊर्जा स्टोरेज और पावर उत्पादन दोनों ही नियंत्रण के अधीन रहता है। इस प्रकार की पंप्द्म स्टोरेज तकनीक का उपयोग विशेष रूप से तब होता है जब अक्षय ऊर्जा स्रोतों, जैसे सोलर और विंड, से उत्पन्न ऊर्जा को भंडारित करके पीक मांग के समय बिजली पैदा करनी हो।
राजस्थान में सर्वे जारी
सिरोही में 1200 मेगावाट का पीएसपी प्लांट लगेगा। जो वर्ष 2030-31 तक पूरा करना है। कम्पलीट हो जाएगा। इसके सर्वे का काम चल रहा है जो जेएस डब्ल्यू एनर्जी नामक कम्पनी कर रही है। डॉक्युमेंटेशन के आधार पर यह परियोजना सिरोही के रेवदर तहसील के निवाज गांव में स्थित है, जहां लगभग 499 मीटर की ऊंचाई का बांध उपलब्ध है, जिसका उपयोग पंप स्टोरेज संचालन के लिए किया जाएगा। इससे रोजाना लगभग 6 घंटे के पीक लोड को पूरा करने के लिए ऊर्जा निकाली जा सकती है। इस प्रोजेक्ट को कादम्बरी पीएसपी नाम दिया गया है और यह आने वाले वर्षों में राजस्थान की ऊर्जा जरूरतों को संतुलित करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
दूसरा प्लांट बारां जिले के शाहपुर में लगेगा। इसकी क्षमता 1800 मेगावाट होगी। इसके सर्वे का काम ग्रीन को एनर्जी नामक कम्पनी कर रही है जो भारत की भारत की प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज कंपनी है। इसके सिविल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल वक्र्स के लिए टेंडर 2024 में जारी हो चुके हैं। इसका से भी बिजली उत्पादन 2032 तक शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पम्प स्टोरेज प्लांट: राजस्थान के दो बांधों पर पीएसपी से बनेगी बिजली
भारत में कुल 38 प्लांट लगेंगे, वर्ष 2031-32 तक कुल 57040 मेगावाट की अतिरिक्त विद्युत क्षमता बढ़ेगी
