जयपुर। जब आसमान में तिरंगा लहराता है और धरती पर सेना की पदचाप गूंजती है, तो हर दिल में देशभक्ति का ज्वार उमड़ता है। ऐसा ही नजारा गुरुवार को राजधानी जयपुर के महल रोड पर तब देखने को मिला जब यहां की सड़कों पर 78वीं आर्मी डे परेड के लिए सेना के जवान उतरे।
गुलाबी नगरी की सड़कों पर पहली बार कैंटोनमेंट से बाहर, आम लोगों के बीच सेना का शौर्य प्रदर्शन अपने आपमें गर्व की अनूभूति करा रहा था। परेड सुबह 9.30 बजे शुरू हुई। लाखों दर्शकों ने इसे देखा। थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड का निरीक्षण किया। दक्षिण पश्चिम कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह ने भव्य परेड का नेतृत्व किया। स्वदेशी सैन्य क्षमता, आधुनिक आयुध और उभरती तकनीक को देखकर विशिष्ट से लेकर आमजन तक कोई भी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सका। इस वर्ष की थीम ‘भारतीय सेना-शौर्य और बलिदानÓ रखी गई। परेड में परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र एवं वीर चक्र विजेता भी विशेष मेहमान के रूप में शामिल हुए। स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म एवं अर्जुन टैंक, के-9 वज्र तोप, बीएमपी वाहन, 155 एमएम अमोघ, नामिस (नाग मिसाइल सिस्टम), पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, शिल्का हथियार प्रणाली, ड्रोन शक्ति, ड्रोन जैमर तकनीक, इलेक्ट्रिक ऑल टैरेन व्हीकल का प्रदर्शन आकर्षण का विशेष केंद्र रहा। नव गठित भैरव बटालियन सहित भारतीय सेना की 7 रेजीमेंट की टुकडिय़ों ने मार्च पास्ट किया। अभिनव सैन्य प्रणालियों में रोबोटिक म्यूल, स्वाथी वेपन लोकेटिंग राडार, मॉड्युलर ब्रिजिंग सिस्टम, मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम, वाहन आधारित इन्फेंट्री मोर्टार सिस्टम, ड्रोन जैमर सिस्टम, मोबाइल कम्युनिकेशन नोड तथा अजय केतु ऑल-टेरेन व्हीकल जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां प्रदर्शित की गईं। भारतीय सेना के विभिन्न बैंड्स के साथ-साथ नेपाल आर्मी बैंड की भागीदारी ने भारत-नेपाल के विशेष सैन्य संबंधों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (रि.) वीके सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी मौजूद रहे।
अवार्ड लेते बेसुध हुई शहीद की मां
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए वन पैरा स्पेशल फोर्स के जवान लान्स नायक प्रदीप कुमार की मां सेना मेडल लेते हुए मंच पर बेहोश हो गईं। इन्हें सैन्य अधिकारियों ने संभाला। उन्हें तुरंत मंच से उतारकर एंबुलेंस से हॉस्पिटल ले जाया गया। अदम्य साहस और वीरता के लिए शूरवीरों सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह, लांस नायक दिनेश कुमार, लांस नायक सुभाष कुमार को मरणोपरांत ‘सेना मेडल (गैलेंट्री)Ó से सम्मानित किया गया।
शौर्य संध्या में बोले राजनाथ: ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं
परेड के बाद, शाम को एसएमएस स्टेडियम में शौर्य संध्या 2026 का आयोजन हुआ। यहां 1000 ड्रोनों का शो मुख्य आकर्षण था, जो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को दर्शाता था। लाइट एंड साउंड शो में शहीदों की कहानियां सुनाई गईं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद परिवारों का सम्मान किया और फस्र्ट डे कवर जारी किया। परंपरागत युद्ध कलाओं का प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें राजस्थानी लोक कलाकारों ने हिस्सा लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि जब तक आतंक की सोच खत्म नहीं होती है, तब तक शांति के लिए हमारा यह प्रयास लगातार चलता रहेगा। मैं राजस्थान की वीर धरती से यह घोषणा कर रहा हूं। आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से सोच-समझ कर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई। इसी कारण से ऑपरेशन सिंदूर भारत के इतिहास में सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि साहस और संतुलन के रूप में याद रखा जाएगा।
दिखी आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर सेना की ताकत

आर्मी डे परेड का मुख्य आकर्षण आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन था। स्वदेशी मिसाइल सिस्टम जैसे पिनाका, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलें दिखाई गईं। टी-90 टैंक, के-9 वज्र तोपें और एटोरव्हीकल यानि हर इलाके में चलने वाले क्विक फाइटिंग वाहनों ने रोड पर दौड़ लगाई। एंटी-एयर और एंटी-टैंक हथियारों का डेमो भी हुआ, जो आत्मनिर्भर भारत की ताकत दिखाता है। तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने तिरंगा एवं संयुक्त सेनाध्वज के साथ पुष्प वर्षा कर और अपाचे और प्रचंड सहित विभिन्न हैलीकॉप्टर्स ने एयरोहेड व अन्य फॉर्मेशन से परेड को भव्य रूप दिया। परेड के समापन पर नाल एयरबेस से आए तीन जगुआर लड़ाकू विमानों की गर्जना ने सभी को रोमांचित कर दिया। परेड में 15,000 से ज्यादा सैनिकों की 30 से अधिक टुकडिय़ां शामिल थीं, जिसमें महिला अग्निवीर टुकड़ी ने भी मार्च किया।
युद्ध कितना लम्बा चलेगा ये मैदान तय करता है: जनरल द्विवेदी
परेड के बाद प्रेस ब्रीफिंग करते हुए थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि आज की परेड में दिव्यास्त्र और शक्ति बाण जैसी यूनिट्स की ताकत भी देखने को मिली। आधुनिक ड्रोन 400 मीटर से लेकर 400 किलोमीटर, यहां तक कि 800 किलोमीटर तक जाने की क्षमता रखते हैं। ऐसे ड्रोन पूरे युद्ध क्षेत्र में घूमकर जरूरत के मुताबिक स्ट्राइक करने, इन्फॉर्मेशन देने और कार्रवाई करने में सक्षम होते हैं। इसके लिए सेना को नए ऑर्गेनाइजेशन और सुपर स्पेशियलिटी ट्रेनिंग वाले जवानों की जरूरत है, जो टारगेट की पहचान, ऑपरेशन और अपने व दुश्मन के सैनिकों में फर्क कर सकें। जनरल द्विवेदी ने कहा कि युद्ध 4 दिन चलेगा या 4 साल, यह पहले से कोई नहीं बता सकता, इसका अंदाजा युद्ध क्षेत्र में ही लगता है। ऐसे में अगर देश को लंबी लड़ाई लडऩी है तो सेना का साजो-सामान देश में ही बनना चाहिए। जरूरत पडऩे पर उसकी रिपेयरिंग भी भारत में ही होनी चाहिए।
