रोशनलाल शर्मा
जयपुर। विद्युत क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। केंद्र सरकार ने ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) विधेयक 2025 जारी किया है। ये 2003 के विद्युत एक्ट में अब तक का सबसे बड़ा संशोधन है। इसमें धारा 42 का संशोधन प्रमुख है। यह संशोधन बिजली वितरण को खोलने का प्रावधान करता है, जहां एक ही क्षेत्र में कई वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) काम कर सकेंगी। जैसे मोबाइल फोन में एयरटेल, जियो या वोडाफोन से कनेक्शन चुन सकते हैं, वैसे ही किसी शहर या मोहल्ले में उपभोक्ता अपनी पसंद की कंपनी से बिजली ले सकेंगे। कंपनियां साझा या अपनी वितरण प्रणाली के माध्यम से सेवा देंगी, लेकिन डुप्लिकेशन से बचते हुए। विधेयक का मकसद प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, सेवा बेहतर करना और नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन देना है।
विधेयक के अनुसार, वितरण लाइसेंसी कुशल नेटवर्क सुनिश्चित करेगा और अन्य कंपनियों को गैर-भेदभावपूर्ण ओपन एक्सेस देगा। धारा 43 में बदलाव से 1 मेगावाट से ऊपर के उपभोक्ताओं को आपूर्ति दायित्व से छूट मिल सकती है। केंद्र सरकार ने 9 अक्टूबर 2025 को विधेयक जारी कर 30 दिनों में सुझाव मांगे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2003 के इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में बड़ा संशोधन है, जो मोनोपॉली खत्म कर बाजार को खोलेगा।
ये होंगे फायदे
यह संशोधन कस्टमर सेन्ट्रालाइज मार्केट (उपभोक्ता-केंद्रित बाजार) बनाएगा। सबसे बड़ा लाभ प्रतिस्पर्धा से होगा। कई कंपनियां आने से बिजली की दरें कम हो सकती हैं, क्योंकि कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए छूट और बेहतर प्लान देंगी। जैसे मोबाइल में डेटा पैक चुनते हैं, वैसे बिजली में भी ग्रीन एनर्जी (सोलर-विंड) या सस्ते रेट वाले ऑप्शन उपलब्ध होंगे। उपभोक्ता अपनी चॉइस से कंपनी बदल सकेंगे, जिससे कस्टमर सर्विस में सुधार आएगा। तेज कनेक्शन, कम कटौती, स्मार्ट मीटरिंग बढ़ेगी। एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ईएसएस) की परिभाषा जोडऩे से रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ेगी, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर पहुंच मिलेगी, क्योंकि नई कंपनियां निवेश करेंगी।
10 लाख करोड़ के निवेश के आसार
आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे बिजली क्षेत्र में 10 लाख करोड़ का निवेश आ सकता है, रोजगार बढ़ेंगे। क्रॉस-सब्सिडी कम होने से इंडस्ट्री और बड़े उपभोक्ताओं को राहत, जो अंतत: अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगा।
ये हो सकते हैं नुकसान
रेगुलेशन कमजोर हुआ तो कीमतों में अस्थिरता आएगी जैसे मोबाइल में शुरुआत में रेट वॉर हुए थे। गरीब और ग्रामीण उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है, क्योंकि क्रॉस-सब्सिडी खत्म होने से सब्सिडी वाली बिजली महंगी हो सकती है। विधेयक में क्रॉस-सब्सिडी 5 साल में खत्म करने का प्रावधान है, जो रेलवे, मेट्रो और मैन्युफैक्चरिंग के लिए लागू होगा। छोटे उपभोक्ताओं के लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन वाला लाइसेंसी नामित होगा, लेकिन अगर कंपनियां लाभदायक क्षेत्रों पर फोकस करेंगी, तो दूरदराज इलाकों में सेवा प्रभावित होगी। साइबर सुरक्षा के नए प्रावधान अच्छे हैं, लेकिन कई कंपनियों से डेटा लीक का खतरा बढ़ेगा। निवेश बढऩे से विदेशी कंपनियां आ सकती हैं, जो स्थानीय डिस्कॉम्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रेगुलेटरी कमीशन को मजबूत करना जरूरी, अन्यथा मोनोपॉली की जगह ऑलिगॉपॉली (कुछ बड़ी कंपनियों का कब्जा) हो सकती है।
आगे क्या
केन्द्रीय ऊर्जा सचिव ने पिछले दो दिनों में सभी राज्यों के ऊर्जा सचिवों, एमडी, सीएमडी और विनियामक आयोगों से चर्चा की है। इसके बाद वे एक रिपोर्ट तैयार करेंगे और ऊर्जा मंत्री को सौपेंगे। ऊर्जा मंत्री इसे पीएम नरेन्द्र मोदी को सौपेंगे। पीएम इसे कैबिनेट में रखकर विधि विभाग को सौपेंगे जहां से ये कानून के मसौदे के रूप में संसद तक लाया जाएगा।
