मुख्य सचिव ने बैठक में घाटे पर जताई नाराजगी, परफोरमेंस से नहीं है संतुष्ठ
जयपुर। जोधपुर विद्युत वितरण निगम के लगातार बढ़ रहे घाटे और वहां की नौकरशाही की कार्यप्रणाली से मुख्य सचिव वी. श्री निवास नाराज से दिख रहे हैं। हालांकि तीनों ही डिस्कॉम्स (जयपुर, अजमेर और जोधपुर) में लगातार बढ़ रहे घाटे को लेकर खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी नाराजगी जता चुके हैं।
इस बीच एक दिन पहले सचिवालय में मुख्य सचिव श्रीनिवास ने तीनों डिस्कॉम्स को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में जो कुछ निकलकर सामने आया है, उसका लब्बोलुआब ये है कि कम से कम जोधपुर डिस्कॉम को तो निजी हाथों में देने के लिए प्लान बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने जोधपुर डिस्कॉम के अधिकारियों पर नाराजगी भी व्यक्त की है।
सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने ऊर्जा सेक्टर की समीक्षा बैठक बुधवार को की थी। इस बैठक में बिजली कंपनियों के बढ़ते घाटे पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि इस बैठक में केंद्र सरकार के प्रस्तावित सुधारों के आधार पर जोधपुर डिस्कॉम को निजी हाथों में देने पर गंभीर विचार विमर्श हुआ है। लेकिन उससे पहले तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान को सरकार द्वारा टेकओवर करने की बात जरूरी बताई गई है। इसका सीधा सा मतलब है कि अब तक का घाटा सरकार वहन करे।
जोधपुर को लेकर एक्शन प्लान बनाने के निर्देश
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने काफी लंबी चर्चा के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए कि जोधपुर डिस्कॉम के आगामी भविष्य को लेकर एक्शन प्लान बनाना शुरू करें। बताया जा रहा है कि आलाधिकारियों को जोधपुर डिस्कॉम को निजी सेक्टर में देने के फायदे-नुकसान पर विचार कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
ऊर्जा में घाटे और सुधार पर लम्बे समय से चर्चा
राजस्थान में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के घाटे और सुधारों पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। राजस्थान की तीनों डिस्कॉम्स (जयपुर, अजमेर, जोधपुर) पर भारी कर्ज है। केंद्र सरकार डिस्कॉम्स के सुधार के लिए निजीकरण या फ्रेंचाइजी मॉडल (जैसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल) को प्रोत्साहित कर रही है, जिसमें कुछ क्षेत्रों का संचालन निजी कंपनियों को सौंपा जाता है। 2024-2025 में निजी भागीदारी की निविदाएं भी जारी हुईं लेकिन कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध किया।
