जयपुर। राजधानी जयपुर की टोंक रोड स्थित पिंजरापोल गौशाला एक बार फिर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर विवादों में आ गई है। महालेखाकार (AG) राजस्थान की अनुपालना लेखापरीक्षा रिपोर्ट में गौशाला प्रबंधन पर करीब 2.21 करोड़ रुपये के अनुदान में गड़बड़ी और नियम विरुद्ध भुगतान लेने के आरोप सामने आए हैं।
मृत पशुओं के नाम पर अनुदान लेने का आरोप
लेखापरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच गौशाला सहायता अनुदान योजना के तहत 2,21,55,820 रुपये का भुगतान कथित रूप से नियमों के विपरीत किया गया। जांच में सामने आया कि अनुदान प्राप्त करने के लिए प्रपत्र-5 और ऑनलाइन रिकॉर्ड में भारी हेरफेर की गई।
भौतिक सत्यापन पर भी सवाल
नियमों के अनुसार गौशालाओं को अनुदान केवल उन्हीं पशुओं पर मिलता है जो निर्धारित अवधि तक गौशाला में मौजूद रहें। लेकिन नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कई ऐसे पशुओं पर भी अनुदान लिया गया जो मौके पर मौजूद नहीं थे।
विधिक नोटिस में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि भौतिक सत्यापन के दौरान मृत और अपंजीकृत पशुओं को भी सत्यापित मान लिया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग को बढ़ावा मिला।
गौसेवा की आड़ में व्यावसायिक गतिविधियों का आरोप
नोटिस में गौशाला परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए हरे और सूखे चारे को दोबारा बेचने का काम किया जा रहा है। इसके लिए लगभग 30 लाख रुपये का ठेका दिए जाने का भी दावा किया गया है।
प्रदूषित पानी से उगाए जा रहे चारे का दावा
विधिक नोटिस में यह भी कहा गया है कि गौशाला में पशुओं को दिया जाने वाला चारा कथित रूप से नाले के प्रदूषित और रासायनिक अपशिष्टयुक्त पानी से उगाया जा रहा है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
स्वतंत्र ऑडिट और FIR की मांग
शिकायतकर्ता ने सरकार से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पिछले दस वर्षों का विशेष ऑडिट, पशुओं की वास्तविक संख्या की दोबारा जांच, प्रदूषित जल के उपयोग पर रोक और अवैध निर्माण हटाने की मांग उठाई है। नोटिस में वर्तमान कार्यकारिणी को भंग कर सरकारी प्रशासक नियुक्त करने की मांग भी की गई है ताकि रिकॉर्ड और साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकी जा सके।
