जयपुर। बड़ी 132 केवीए और उससे ऊपर की विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विद्युत मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को जारी एक आदेश में मार्च 2025 की सप्लीमेंटरी गाइडलाइंस में संशोधन किया है। यह संशोधन राइट ऑफ वे के लिए मुआवजे की प्रक्रिया में आ रही देरियों को खत्म करेगा। अब भूमि मूल्यांकन तेज होगा, जिससे खेत, जंगल या किसी भी प्रभावित संपत्ति के मालिकों को जल्द मुआवजा मिल सकेगा।
ये थी मूल गाइडलाइन
21 मार्च 2025 को विद्युत मंत्रालय ने ट्रांसमिशन लाइनों के मुआवजे पर सप्लीमेंटरी गाइडलाइंस जारी की थीं। इनमें मार्केट रेट कमिटी बनाई गई, जो जिला कलक्टर की अध्यक्षता में काम करती है। कमेटी में लैंडओनर्स के प्रतिनिधि, ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर और अन्य शामिल होते हैं। भूमि मूल्यांकन के लिए वैल्युएर नामांकित किए जाते हैं, और उनकी रिपोर्ट के आधार पर बाजार दर तय होती है। लेकिन प्रैक्टिस में समस्या आई। लैंडओनर्स के प्रतिनिधि द्वारा वैल्युएर नामांकन और रिपोर्ट सबमिशन में देरी होती थी, जिससे प्रोजेक्ट्स रुक जाते थे। 132 केवीए से ऊपर की लाइनों में यह समस्या आम है, क्योंकि ये लंबी दूरी तय करती हैं और खेत, जंगल, आवासीय क्षेत्र या अन्य संपत्तियां प्रभावित होती हैं। मुआवजा न मिलने से स्थानीय विरोध और कानूनी विवाद बढ़ते हैं।
अब क्या संशोधन
केंद्र सरकार को इन देरियों की जानकारी मिली और मंत्रालय ने कहा कि लैंड वैल्युएर नामांकन और रिपोर्ट सबमिशन में लंबा समय लग रहा है। इसलिए, पैरा 3 में संशोधन किया गया। मार्केट रेट कमेटी अब इंसॉल्वेंसी एंड बैंक बोर्ड ऑफ इंडिया(आईबीबीआई)से इंपैनल्ड वैल्युएर नियुक्त करेगी। वैल्युएर राज्य से ही होने चाहिए, या यदि पर्याप्त नहीं तो पड़ोसी राज्यों से। इससे प्रक्रिया तेज और प्रोफेशनल होगी। कमेटी की बैठक वाले दिन ही तीन वैल्युएर नामित होंगे। एक लैंडओनर्स के प्रतिनिधि द्वारा, एक टीएसपी द्वारा और एक कलक्टर द्वारा। लैंडओनर्स का प्रतिनिधि प्रभावित मालिकों में से होगा। नामांकन के 21 दिनों में वैल्युएर सील्ड रिपोर्ट कलक्टर को देंगे। कलक्टर तीनो रिपोर्ट मिलने के बाद लॉटरी से दो खोलेंगे। बाजार दर तय करने का फॉर्मूला
यदि दो वैल्यूएशन में अंतर 20 प्रतिशत से कम है, तो औसत लिया जाएगा। यदि 20 प्रतिशत से ज्यादा, तो निचली वैल्यू से 10 फीसदी ज्यादा दर मानी जाएगी। यदि सहमति न हो, तो तीसरी रिपोर्ट शामिल करके दो सबसे निचली वैल्यू का औसत लिया जाएगा।
बिजली की ट्रांसमिशन लाइनों के मुआवजे में संशोधन: वेल्यूएशन प्रक्रिया तेज होगी
