जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने आयुर्वेद विभाग के कार्यों की प्रभावी निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने, अधिकारियों द्वारा आयुष चिकित्सालयों का नियमित रूप से निरीक्षण करने और प्रत्येक निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट समयबद्ध रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने बुधवार को शासन सचिवालय में आयोजित आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा एवं होम्योपैथी के माध्यम से राज्यभर में विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में संचालित सभी आयुष चिकित्सालयों की मासिक रिपोर्ट अनिवार्य रूप से समय पर प्रस्तुत की जाए, जिसमें विभागवार विवरण एवं प्रत्येक चिकित्सालय द्वारा दी जा रही सेवाओं की जानकारी शामिल हो।
उन्होंने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) जयपुर एवं डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के मध्य फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम किया जाए, जिससे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के ज्ञान और अनुभव में वृद्धि हो सके। इसके साथ ही दोनों संस्थानों के बीच कार्यशाला, संयुक्त शोध पत्र एवं एमओयू के निर्देश भी दिए गए।
ये रहे मौजूद
इससे पहले आयुष विभाग के प्रमुख शासन सचिव सुबीर कुमार ने विभाग की कार्यप्रणाली एवं प्रगति के सम्बन्ध में प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय,जोधपुर के कुलगुरु डॉ.गोविन्द सहाय शुक्ला, एनआईए, जयपुर के कुलगुरु डॉ. संजीव शर्मा, आयुर्वेद निदेशक डॉ. आनंद शर्मा, उप शासन सचिव आयुर्वेद इन्द्रजीत सिंह, होम्योपैथी निदेशक डॉ. मनीषा सक्सेना, यूनानी उप निदेशक डॉ. हनुमान प्रसाद सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य सचिव ने दिए आयुर्वेद चिकित्सालयों के नियमित निरीक्षण के निर्देश
समीक्षा: एनआईए, जयपुर एवं राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय,जोधपुर के मध्य फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम किया जाए
