जयपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने में स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग, देश की उत्पादन क्षमता में वृद्धि और स्वभाषा के उपयोग की सबसे बड़ी भूमिका है। भाषा ही समाज, धर्म और संस्कृति को जीवंत रखती है। इसलिए सभी अपने परिवार और परिचितों से स्वभाषा में संवाद करें जिससे नई पीढ़ी हमारे गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति से परिचित हो सके।
शाह शनिवार को जोधपुर के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय माहेश्वरी महाधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 में हर क्षेत्र में देश को अग्रणी बनाने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद भारत की अर्थव्यवस्था 11वें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंची है और जल्द ही हम विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हैं।
विकसित भारत में माहेश्वरी समाज की भूमिका महत्वपूर्ण: बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि राजस्थान शौर्य, पराक्रम और उद्यमशीलता की धरती है। माहेश्वरी समाज का स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी के बाद के राष्ट्र निर्माण तक समाज का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने आर्थिक-सामाजिक संघर्ष से जूझ रहे वर्गों के उत्थान में अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की।
समाज सेवा की भावना सबसे बड़ी ताकत: सीएम शर्मा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ये आयोजन समाज की एकता और सामाजिक प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि माहेश्वरी समाज अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने के लिए तत्पर है। शर्मा ने कहा कि माहेश्वरी समाज भारत के सबसे प्राचीन और सम्मानित व्यापारिक समुदायों में से एक है। यह समाज देश प्रथम के सिद्धांत को अपने जीवन में उतारता रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती से निकला यह समाज आज पूरे विश्व में फैला हुआ है। माहेश्वरी समाज ने सदैव सेवा-त्याग-सदाचार के मूल्यों को जीवन में धारण किया है तथा समाज के विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी अपना अमूल्य योगदान दिया है।
