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अजमेर। ब्यावर से भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत की बेटी और आरएएस 2018 बैच की अधिकारी कंचन सिंह चौहान को राजस्व मंडल ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए एपीओ कर दिया है। मंगलवार शाम जारी आदेश के अनुसार कंचन अब अपनी उपस्थिति राजस्व मंडल अजमेर में दर्ज कराएंगी। कंचन इससे पहले भीलवाड़ा जिले की करेडा तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात थीं।
प्रशासनिक हलकों में यह आदेश इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि कंचन चौहान को लेकर चयन के समय से ही दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप रहा है कि कंचन ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय और एसओजी को भी शिकायत भेजी गई थी। राज्य सरकार ने मामले की जांच एसओजी को सौंपने का निर्णय लिया थाए हालांकि जानकारी के अनुसार एसओजी की जांच रिपोर्ट अभी तक राजस्व मंडल प्रशासन को नहीं भेजी गई है। सूत्रों के मुताबिक, शिकायतों के बाद राजस्व मंडल ने पिछले पांच वर्षों में दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति पाए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की दोबारा जांच भी करवाई थी, जिसमें कुछ मामलों में दस्तावेज संदिग्ध/फर्जी मिलने की सूचना सामने आई। इसी पृष्ठभूमि में कंचन चौहान से जुड़ा प्रकरण एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
मामला एक नजर: मामले में ब्यावर निवासी फणीश कुमार सोनी ने 12 अगस्त 2025 को कंचन चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में नवोदय विद्यालय और उदयपुर विश्वविद्यालय से जुड़े शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच तथा दिव्यांगता संबंधी स्थिति का पुन: मेडिकल परीक्षण कराने की मांग रखी गई।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि मेडिकल बोर्ड का गठन किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में हो, ताकि जांच निष्पक्ष रहे। शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस डॉक्टर के प्रमाण पत्र पर विवाद उठ रहा है,वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं।
कंचन की सरकारी सेवा की बात करें तो 2018 परीक्षा में इंटरव्यू के बाद उनकी रैंक लगभग 600 के करीब बताई जाती है। उनकी पहली पोस्टिंग 27 दिसंबर 2021 को भीलवाड़ा के गुलाबपुरा में नायब तहसीलदार के रूप में हुई थी और वे करीब एक साल से करेडा में तैनात थीं।
दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर ब्यावर के भाजपा विधायक की बेटी कंचन एपीओ
