रोशनलाल शर्मा
नया साल 2026 आने वाला है। जहां एक तरफ क्लबों, होटलों और पार्टीज में युवा नए साल का जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के प्रमुख मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। लोग नए साल की शुरुआत भगवान के दर्शन से करना चाहते हैं। 21वीं सदी में भी हमारी आस्था न सिर्फ बरकरार है, बल्कि पिछले सालों की तुलना में और बढ़ी है। इस बार राजस्थान के मंदिरों से लेकर अयोध्या तक, लाखों श्रद्धालु भगवान के चरणों में नए साल का आगाज कर रहे हैं। राम मंदिर अयोध्या, खाटू श्याम जी, सांवरिया सेठ, सालासर बालाजी, करणी माता, त्रिपुरा सुंदरी, श्री नाथ जी नाथद्वारा, एकलिंग जी उदयपुर और गोरधन जी भरतपुर। जानेंगे वहां की विशेष व्यवस्थाएं, दर्शन की सुविधाएं, अपेक्षित भीड़ और सुरक्षा इंतजाम।
ये कोई नया ट्रेंड नहीं है, लेकिन इस बार ये और जोर पकड़ रहा है। क्लबों की चकाचौंध से दूर, लोग शांति और आशीर्वाद की तलाश में मंदिरों की ओर रुख कर रहे हैं। खासकर राजस्थान में तो जैसे आस्था का महाकुंभ लग गया है। प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं, क्योंकि अपेक्षित भीड़ लाखों में है। वीआईपी दर्शन कई जगह बंद कर दिए गए हैं, ताकि आम श्रद्धालु को परेशानी न हो। होटल-धर्मशालाएं फुल बुक हैं, और कई मंदिरों में प्रशासन ने न आने की अपील भी की है अगर जरूरी न हो तो। लेकिन आस्था कहां रुकती है! आपको याद होगा इसी साल की शुरुआत में हुआ महाकुंभ और साल के अन्त में भी इसे श्रद्धा का महाकुंभ न कहा जाए तो गलत होगा।
सबसे पहले बात करते हैं अयोध्या के श्री राम मंदिर की। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ भी 31 दिसंबर को मनाई जा रही है। यहां 27 दिसंबर से 2 जनवरी तक विशेष कार्यक्रम हैं जैसे रामचरितमानस पाठ, भजन-कीर्तन और पालकी यात्रा। अपेक्षित भीड़- लाखों में, पिछले दिनों ही 2-3 लाख रोज आ चुके हैं। यहां की होटलें और धर्मशालाएं एक जनवरी तक फुल बुक हैं। 2-2 किलोमीटर लंबी कतारें हैं, होल्डिंग एरिया एक्टिवेट है और कड़ी सुरक्षा है। दर्शन समय बढ़ाया गया है। अगर जा रहे हैं तो सुबह जल्दी पहुंचें और धैर्य रखें। नए साल की शुरुआत रामलला के दर्शन से -क्या इससे बेहतर कुछ हो सकता है?
खाटू श्याम जी, सीकर राजस्थान जिन्हें हारे का सहारा कहा जाता है। यहां नए साल पर 5-6 लाख श्रद्धालुओं की उम्मीद है। यहां वीआईपी एंट्री 29 दिसंबर से 2 जनवरी तक बंद है। सिर्फ प्रोटोकॉल वालों के लिए अलग एंट्री की व्यवस्थाएं हैं। 4 लाइनें बनाई गई हैं, दर्शन 1.5-2 घंटे में हो रहे हैं। बैरिकेडिंग, पानी की व्यवस्था पूरे रूट पर है। 17 किमी व्हीकल फ्री जोन रखा गया है। बाबा का विशेष श्रृंगार और सजावट हो रही है।
चूरू के सालासर बालाजी महाराज के दरबार में भी भारी रश है। यहां भी क्राउड कंट्रोल के लिए बैरिकेड्स, सुरक्षा बल तैनात है। नए साल पर दर्शनार्थी बड़ी संख्या में बालाजी का आशीर्वाद लेना चाहते हैं। नारियल बांधने की रस्म यहां खास है। अगर प्लान है तो सुबह या देर रात जाएं। सांवरिया सेठ, चित्तौडग़ढ में कृष्ण भगवान के स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। बीकानेर की करणी माता मंदिर को चूहों वाली माता के मंदिर के रूप में जाना जाता है। यहां नए साल पर परिवारों की भीड़ ज्यादा है।साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा, क्योंकि चूहे यहां पूजनीय हैं और किसी को सफेद चूहे के दर्शन हो जाए तो फिर बात ही क्या है। त्रिपुरा सुन्दरी, नाथद्वारा के श्री नाथ जी, उदयपुर का एकलिंग जी में भी श्रद्धा का ज्वार कुछ ऐसा ही उमड़ा हुआ है। भरतपुर में गोरधन जी की परिक्रमा के लाखों श्रद्धालुं पहुंचे हैं। यहां 7-8 लाख श्रद्धालु परिक्रमा कर रहे हैं। ये देखकर गर्व होता है कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी आस्था जिंदा है। नए साल की शुरुआत भगवान के आशीर्वाद से करें तो साल भर सुख-शांति रहेगी।
