रोशनलाल शर्मा
भुवनेश्वर। कोरोना महामारी के समय बनी 1300 जांच लैब्स और उनके लिए खरीदी गई करीब 1500 आरटीपीसीआर मशीनें अब डेंगू-मलेरिया की जांच के काम में ली जाएंगी।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानि आईसीएमआर की एडीजी डा. संघमित्रा पति ने राजस्थान और केरल से आए पीआईबी के पत्रकार दल से बात करते हुए कहा कि कोरोना के समय भारी भरकम बजट से खरीदी गई आरटीपीसीआर मशीनों को अब महामारी के लगभग खत्म होने के बाद नई महामारी का रूप ले रहे डेंगू और मलेरिया की जांच में उपयोग किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक बदलाव के काम आईसीएमआर ने शुरू कर दिया है। डा. संघमित्रा के अनुसार डेंगू की वैक्सिन का एक चरण पूरा हो चुका है और दूसरे चरण में इंसानों पर ट्रायल शुरू हो गया है। इसके मायने ये है कि अब कभी भी डेंगू की वैक्सीन सामने आ सकती है। आईसीएमआर ने इसके लिए कई कम्पनी के साथ करार करने के बाद उन्हें अपनी रिसर्च सौंप दी।
साथ ही पूरे देश में स्वास्थ्य, पशु, वन और खाद्य सुरक्षा विभागों के समन्वय एक ऐसा पूरा सिस्टम तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य में जानवरों से आने वाले सभी प्रकार के वॉयरस के बारे में पूर्वानुमान हो सके। खांसी और डायरिया जैसे पिछड़े इलाकों में पनपने वाले रोगों पर भी सरकार विशेष फोकस कर रही है।
अपनी रिचर्स की वजह से देशभर में पहचान बना चुके क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र भुवनेश्वर का नाम बदलकर अब ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान’ कर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत कार्यरत यह संस्थान पिछले चार दशकों से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
स्वदेशी मलेरिया वैक्सीन भी तैयार, कभी भी हो सकती है लांच
संस्थान ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी के साथ मिलकर भारत की पहली स्वदेशी मल्टी-स्टेज मलेरिया वैक्सीन तैयार की है। यह वैक्सीन प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी के दो संवेदनशील चरणों को लक्षित करती है, जिससे संक्रमण रुकने के साथ ही सामुदायिक प्रसार भी थमता है। यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय टीकों की तुलना में अधिक समय तक कमरे के तापमान पर स्थिर रह सकती है। प्री-क्लिनिकल ट्रायल में प्रभावी पाए जाने के बाद इसकी तकनीक बायोलॉजिकल ई, भारत इम्यूनोलॉजिकल्स, जायडस लाइफ, टेकवेंशन और पैनासिया बायोटेक जैसी 5 शीर्ष कंपनियों को हस्तांतरित की गई है।
राजस्थान के दस शहरों में चलेगा विशेष स्वास्थ्य अभियान
डा. संघमित्रा ने बताया की राजस्थान के दस जनजाति बहुल जिलों में विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाने की तैयारी की गई है। इनमें उदयपुर, बारां, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली सहित दस आदिवासी बहुल क्षेत्रों का चयन किया जा चुका है। जल्द ही भारत सरकार और राज्य सरकार के विभिन्न विभाग मिलकर इस पर काम शुरू करने जा रहे हैं। ट्राइबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी के नाम से इस कार्यक्रम को जनजातीय कार्य मंत्रालय ने देश के 95 जिलों के 8 लाख विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के स्वास्थ्य अध्ययन के लिए आईसीएमआर को नोडल केंद्र बनाया है।
कोविड-19 महामारी में निभाई अग्रणी भूमिका
कोरोना महामारी के दौरान आईसीएमआर ने मात्र 3 दिन के रिकॉर्ड समय में बीएसएल-थर्ड प्लस कोबास लैब स्थापित की और ओडिशा के 10 लाख व झारखंड के 15 हजार से अधिक सैंपलों की जांच की। संस्थान ने देश में पहली बार आरटी-पीसीआर के लिए लार (Saliva) के विकल्प और कोबास 6800 प्लेटफॉर्म पर ‘पूल्ड टेस्टिंग’ की उपयोगिता को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया।
कोरोना की जांच के लिए आई आरटीपीसीआर मशीनों से होगी डेंगू-मलेरिया की जांच
डेंगू वैक्सीन का एक फेज पूरा, दूसरे फेज में इंसानों पर परीक्षण चल रहा
