नई दिल्ली। नीतिन नबीन ने भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी बहुत कम उम्र में संभाली है जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपना बॉस बताया है। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में नितिन नबीन ने 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाल लिया है और इसके साथ ही भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
नितिन नबीन बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं और संगठनात्मक काम में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर विधानसभा तक पहुंचा। वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और पार्टी संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। 14 दिसंबर 2025 को उन्हें पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था और अब वे निर्विरोध भाजपा के फुल टाइम राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। सोमवार को उनका अकेला नामांकन आया और मंगलवार को उन्होंने पदभार संभाल लिया।
पदभार ग्रहण समारोह अपने आप में खास था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उन्हें माला पहनाने पहुंचे, उन्हें अध्यक्ष के दफ्तर तक ले गए, मिठाई खिलाई और परिवार से भी मिले। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रही मोदी की वो बात, जब उन्होंने कहा….मैं मानता हूं कि नितिन जी मेरे बॉस हैं, मैं कार्यकर्ता हूं। अब वे मेरे काम का आकलन करेंगे।
मोदी ने अपने 55 मिनट के भाषण में कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1984 में कांग्रेस को 400 से ज्यादा सीटें मिली थीं, लेकिन आज वह 100 सीटों के लिए तरस रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने पतन की समीक्षा नहीं करती, क्योंकि समीक्षा करेंगे तो सवाल उसी परिवार पर उठेंगे जिसने पार्टी पर कब्जा कर रखा है। इसके अलावा मोदी ने घुसपैठियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अपने यहां अवैध घुसपैठियों को बाहर निकाल रहे हैं और भारत को भी यही करना चाहिए। उनके मुताबिक घुसपैठिए गरीबों और युवाओं के हक छीनते हैं और देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। साथ ही उन्होंने उन राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा, जो वोट बैंक की राजनीति में घुसपैठियों को बचाते हैं। मोदी ने यह भी बताया कि भाजपा अब सिर्फ संसद और विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम और नगरपालिकाओं में भी सबसे पसंदीदा पार्टी बन चुकी है। महाराष्ट्र, केरल और तिरुवनंतपुरम जैसे उदाहरण उन्होंने गिनाए।
अपने पहले भाषण में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि हम ऐसे राजनीतिक दल से जुड़े हैं, जहां राजनीति सत्ता नहीं, साधना है। राजनीति भोग नहीं, त्याग है। राजनीति ऐशो-आराम नहीं, तपस्या है। उन्होंने खुद को एक साधारण कार्यकर्ता बताया, जिसकी असाधारण यात्रा को आज सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को देखकर उन्होंने सीखा कि जनता से जुडऩे वाला ही बड़ा नेता बनता है। उन्होंने राम मंदिर, अनुच्छेद 370, कश्मीर में तिरंगे की शान और राष्ट्रवाद के मुद्दों को भी अपने भाषण में शामिल किया।
नबीन के सामने ये चुनौतियां
भाजपा आज देश की सबसे बड़ी पार्टी है। बड़े नेताओं, राज्यों की राजनीति और आंतरिक संतुलन को संभालना आसान काम नहीं है। हर राज्य की अपनी राजनीति है, अपने नेता हैं, अपने समीकरण हैं। नितिन नबीन ने खुद कहा कि भाजपा का लक्ष्य अब सिर्फ पारंपरिक राज्यों तक सीमित नहीं है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी को मजबूत करना बड़ी चुनौती है। यहां भाजपा को अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा है। भले ही कांग्रेस कमजोर हो, लेकिन क्षेत्रीय दल मजबूत हैं और कई राज्यों में भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है। ऐसे में चुनावी रणनीति बनाना नितिन नबीन की बड़ी जिम्मेदारी होगी। भाजपा की ताकत उसका कार्यकर्ता है। बूथ लेवल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़कर रखना, उन्हें प्रेरित करना और उनकी बात सुनना बहुत जरूरी होगा। भाजपा में सरकार और संगठन अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं। पार्टी अध्यक्ष का काम सरकार को दिशा देना और संगठन को मजबूत करना है। इस संतुलन को बनाए रखना आसान नहीं होता।
लेकिन नितिन नबीन का अनुभव यही है कि वे संगठन की राजनीति को अच्छे से समझते हैं। वे जमीन से जुड़े नेता माने जाते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
