नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि अब तो बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं। कोर्ट ने पूछा कि कुत्तों के कारण आम लोगों को आखिर कब तक परेशानी झेलनी पड़ेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश सड़कों के लिए नहीं, बल्कि केवल संस्थागत क्षेत्रों के लिए है।
पीठ ने सवाल उठाया कि स्कूलों, अस्पतालों और अदालत परिसरों के भीतर आवारा कुत्तों की क्या आवश्यकता है और उन्हें वहां से हटाने पर क्या आपत्ति हो सकती है। बुधवार को मामले की सुनवाई ढाई घंटे तक चली। अगली सुनवाई 8 जनवरी यानि गुरुवार सुबह 10.30 बजे से फिर शुरू होगी।
कोर्ट रूम में क्या हुआ
बहस में आवारा कुत्तों के पक्ष में कपिल सिब्बल ने कहा कि जो कुत्ता काटे उसकी नसबंदी की जा सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा, अब तो बस एक ही चीज बाकी है, कुत्तों को भी काउंसलिंग देना। ताकि वापस छोड़े जाने पर वह काटे नहीं। सिब्बल ने कहा, जब भी मैं मंदिरों वगैरह में गया हूं, मुझे कभी किसी ने नहीं काटा। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया कि आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है। लोग मर रहे हैं।
दुर्घटनाओं का कारण बन रहे
कोर्ट ने कहा कि कुत्तों से दुर्घटनाओं का खतरा भी होता है। आप इसकी पहचान कैसे करेंगे? सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह आप नहीं जान सकते।
कोर्ट ने सरकार से पूछा कि 2018 में एनिमल बर्थ कंट्रोल को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे। ये ठीक से लागू क्यों नहीं हुए। नियमों के पालन में देरी से जनता को नुकसान नहीं होना चाहिए।
